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प्यार

man and woman holding hands walking on seashore during sunrise
Photo by Ibrahim Asad on Pexels.com

पूरी प्रकति में प्यार निहित है ,
क्षितिज पर धरती और आसमान का मिलना, ये प्यार ही तो है।
उषा के आने पर कमल का खिलना यह प्यार ही तो है ।
वृक्षों का छूम छूम कर वर्षा का स्वागत करना ये प्यार ही तो है।
नदियों का समुद्र से मिलना यह प्यार ही तो है ।
रात के अँधेरे में तारो का झिलमिलाना यह प्यार ही तो है ।
पूरी प्रकति प्यार से सरोबार है, क्यों न हम इस प्रकति से थोड़ा सा प्यार उधार ले लॆ,
और अपनी जिंदगी सवार ले॥

कैद

तुमको भुलाने की कोशिश में,
हमने दिन रात एक कर दिए ।
पर दिन हो या रात,
तुम एक साये की तरह, मेरे साथ रहते हो।
भोर की पहली किरण के साथ ,
तुम मेरे अंतर्मन में जाग जाते हो,
और रात्रि के अंतिम पहर तक मेरे साथ रहते हो।
मुझे बेबस बना दिया है तुमने ,
तुम्हारी याद , बस याद नहीं है, एक कैद हैं,
जिसमे में दिन रात तड़पती हुँ ,
अपनी इस बेबसी ,
तड़प को तुमसे छुपाने की कोशिश,
में अपने आप से छूपती फिरती हुँ॥

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विश्वास

birds flying over body of water during golden hour
Photo by Johannes Plenio on Pexels.com

सड़क के किनारे खड़े बिजली के खंबो से लटके बिजली के ये बल्ब,
कितने  असहाय प्रतीत होते है,
जिनका जलना बुझना दुसरो पर निर्भर है ।
किन्तु मैं , मैं क्यों अपने आप को इतना असहाय महसूस करती हुँ ,
मैं तो अपनी इच्छा की स्वामिनी हुँ ।
मैं तो किसी के द्वारा नियंत्रित नहीं की गयी हुँ,
हाँ, मैं भी तो उस सूरज की तरह बन सकती हुँ,
जो अपने उदय से अस्त होने तक दुनिया को प्रकाश मान करता है।
लोग कहते है सूरज अस्त हो गया,
पर सूरज दिृढता पुर्वक कहता है,
कि रात तुम मुझे कुछ देर के लिये ढक सकती हो पर हमेशा के लिये नही ।
मैं उदित होता रहुंगा,
और दुनिया को प्रकाशमान करता रहुंगा।
मैं कभी हार नही सकता॥
लोग कहते की दुनिया हमेशा चढ़ते सूरज को प्रणाम करती है,
पर सूरज जब अस्त होता है ,तो प्रकति के चेहरॆ की लालिमा क्यों बढ़ जाती है ,
क्योंकि प्रकति को ये विश्वास है,
कल फिर से नया सबेरा होगा,
पूरब में लाली छाएगी,
और वह फिर से एक नया गीत जाएगी॥

सुकून

ओठो पर मुकराहट पर ये आखें सच बोल देती है,
हमने चाहा ना था पर या ख्ता हमसे हो गयी.
अब बस ज़िदगी की रफ़्तार के साथ चलते चलते ,
ये आखें थोड़ा सा सुकून चाहती है ,
नमी से भरी हुई यह आखें थोड़ा सा मुकरारना चाहती है.

Living with Clinical Depression

 

Living with clinical depression is like every day you fight with yourself to do the simple task, to drag yourself to work, to force yourself to do simple things.

Feeling unworthy, useless and extreme fatigue is part and parcel of the depressed person.

They are real fighters who keep on fighting with themselves. All the happiness of life is lost and the struggle is to make yourself worthy. To find a purpose for life.

Your illness engulfs your thoughts, actions and you yourself do not know why it is happening.

Why are you failing in those tasks which were so easy for you?  Clinical depression affects the whole personality and it is hard to identify your feelings.

Many people because of lack of knowledge termed Clinical depression as madness or they ridicule the people who are depressed by calling them mad.

Disease will not see any caste, religion, age or status.

It can affect everybody. It is like a ticking bomb.

The need is to create awareness in society and realize that clinical depression can be treated.

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अहसास

हर आहत पर तेरा नाम है , हर खुशी तेरे बिना अधूरी है ,
अधूरेपन का अहसास जो अब हमसफ़र बन गया है,
अधूरापन ही सही इसमे तू तो है ,
कुछ ना होकर भी कुछ खास है, जो ह्मे बार बार तुम्हारी ओर झुकाता है ,
मजबूर करता है , तुम्हे ना पाने की नाकाम कोशिश में हर बार यह यह दिल जीत था है.

उमीद

क्यो इंतजार करते है, जिसकी कोई उमीद नही हो
क्यो ये आखें आसुओ से भर जाती ,
उस पल के लिए जो छोड़ आए बहुत पहले
एक हसीन पल की चाहत मे कितने लम्हे सिसक उठे.
यह कैसा भ्वर जिसमे हम डूब के उतर गये.