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Life Inspiration

My Papa always used to say, be good to others even when they are bad with you. I always argued with him, ‘we should be good with people who are good to us and bad with people who are bad to us’. Times passed and my father died before I can complete my education. I grew more bitter. I started working, met different people from different backgrounds but that bitterness, hollowness was always there. One day I sat down and wondered why I am so sad and lonely from the inside, why I feel so empty, then I remembered my father and his lines do good with others even when they do bad with us. I just started following that and from that day my life changed. I still get angry, I still get irritated, but I do not carry forward any grudge in my heart. I understood the true meaning of my Papa’s lines by doing good to people or forgiving who have hurt you, you are actually healing yourself, you are keeping yourself away from bitterness, from anguish and above all you can sleep peacefully. You are a free and happy soul

गुनहगार

कभी कभी जिंदगी आपको कितनी अजीब लगती है,
क्या खोया क्या पाया के हिसाब में ,
हम अपनी मासूमियत को खो देते है ।
मैं नहीं कहती की मैं सही हुॅ , पर गलत भी नहीं ,
मुझे उस चीज की सजा तो मत दो,
जिस पर मेरा
अख्तियार नहीं।
क्यों हमसें मुस्कराने का हक़ भी छीन लिया,
इतने तो हम गुनहगार नहीं ॥

woman looking at sea while sitting on beach
Photo by Pixabay on Pexels.com

सिखाया

जिंदगी ने हमें बहुत कुछ सिखाया,
अपने आप को माफ़ करना सिखाया ।
अपनी अहमहीयत को समझना सिखाया।
ना सिखाया तो बस एक चीज ,
किसी का दिल तोड़ना नहीं सिखाया ॥

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प्यार

man and woman holding hands walking on seashore during sunrise
Photo by Ibrahim Asad on Pexels.com

पूरी प्रकति में प्यार निहित है ,
क्षितिज पर धरती और आसमान का मिलना, ये प्यार ही तो है।
उषा के आने पर कमल का खिलना यह प्यार ही तो है ।
वृक्षों का छूम छूम कर वर्षा का स्वागत करना ये प्यार ही तो है।
नदियों का समुद्र से मिलना यह प्यार ही तो है ।
रात के अँधेरे में तारो का झिलमिलाना यह प्यार ही तो है ।
पूरी प्रकति प्यार से सरोबार है, क्यों न हम इस प्रकति से थोड़ा सा प्यार उधार ले लॆ,
और अपनी जिंदगी सवार ले॥

कैद

तुमको भुलाने की कोशिश में,
हमने दिन रात एक कर दिए ।
पर दिन हो या रात,
तुम एक साये की तरह, मेरे साथ रहते हो।
भोर की पहली किरण के साथ ,
तुम मेरे अंतर्मन में जाग जाते हो,
और रात्रि के अंतिम पहर तक मेरे साथ रहते हो।
मुझे बेबस बना दिया है तुमने ,
तुम्हारी याद , बस याद नहीं है, एक कैद हैं,
जिसमे में दिन रात तड़पती हुँ ,
अपनी इस बेबसी ,
तड़प को तुमसे छुपाने की कोशिश,
में अपने आप से छूपती फिरती हुँ॥

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विश्वास

birds flying over body of water during golden hour
Photo by Johannes Plenio on Pexels.com

सड़क के किनारे खड़े बिजली के खंबो से लटके बिजली के ये बल्ब,
कितने  असहाय प्रतीत होते है,
जिनका जलना बुझना दुसरो पर निर्भर है ।
किन्तु मैं , मैं क्यों अपने आप को इतना असहाय महसूस करती हुँ ,
मैं तो अपनी इच्छा की स्वामिनी हुँ ।
मैं तो किसी के द्वारा नियंत्रित नहीं की गयी हुँ,
हाँ, मैं भी तो उस सूरज की तरह बन सकती हुँ,
जो अपने उदय से अस्त होने तक दुनिया को प्रकाश मान करता है।
लोग कहते है सूरज अस्त हो गया,
पर सूरज दिृढता पुर्वक कहता है,
कि रात तुम मुझे कुछ देर के लिये ढक सकती हो पर हमेशा के लिये नही ।
मैं उदित होता रहुंगा,
और दुनिया को प्रकाशमान करता रहुंगा।
मैं कभी हार नही सकता॥
लोग कहते की दुनिया हमेशा चढ़ते सूरज को प्रणाम करती है,
पर सूरज जब अस्त होता है ,तो प्रकति के चेहरॆ की लालिमा क्यों बढ़ जाती है ,
क्योंकि प्रकति को ये विश्वास है,
कल फिर से नया सबेरा होगा,
पूरब में लाली छाएगी,
और वह फिर से एक नया गीत जाएगी॥