प्यार

man and woman holding hands walking on seashore during sunrise
Photo by Ibrahim Asad on Pexels.com

पूरी प्रकति में प्यार निहित है ,
क्षितिज पर धरती और आसमान का मिलना, ये प्यार ही तो है।
उषा के आने पर कमल का खिलना यह प्यार ही तो है ।
वृक्षों का छूम छूम कर वर्षा का स्वागत करना ये प्यार ही तो है।
नदियों का समुद्र से मिलना यह प्यार ही तो है ।
रात के अँधेरे में तारो का झिलमिलाना यह प्यार ही तो है ।
पूरी प्रकति प्यार से सरोबार है, क्यों न हम इस प्रकति से थोड़ा सा प्यार उधार ले लॆ,
और अपनी जिंदगी सवार ले॥

One thought on “प्यार

  1. हम फ़क़ीरों से बे-अदाई क्या ,
    आन बैठे जो तुम ने प्यार किया ,
    -मीर तक़ी मीर

    बहुत खूब

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