कैद

तुमको भुलाने की कोशिश में,
हमने दिन रात एक कर दिए ।
पर दिन हो या रात,
तुम एक साये की तरह, मेरे साथ रहते हो।
भोर की पहली किरण के साथ ,
तुम मेरे अंतर्मन में जाग जाते हो,
और रात्रि के अंतिम पहर तक मेरे साथ रहते हो।
मुझे बेबस बना दिया है तुमने ,
तुम्हारी याद , बस याद नहीं है, एक कैद हैं,
जिसमे में दिन रात तड़पती हुँ ,
अपनी इस बेबसी ,
तड़प को तुमसे छुपाने की कोशिश,
में अपने आप से छूपती फिरती हुँ॥

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